"आजादी के बाद देश में अक्सर ये माना जाता था कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस का निधन विमान हादसे में नहीं हुआ है. वो जल्द अज्ञातवास से वापस स्वदेश लौटेंगे और तब देश में आमूलचूल बदलाव आएगा. ये तो चर्चाओं की बात थी लेकिन नेताजी आजादी की लड़ाई के दौरान आजाद हिंद फौज के सहयोगियों से एक खास इच्छा जाहिर करते थे, जिसके लिए वो आजादी के बाद हिमालय जाना चाहते थे.
उनके एक खास सहयोगी एसए अय्यर ने इस बारे में कई बार लिखा भी. इसमें ये बताया गया है कि सुभाष उनसे अक्सर आजादी के बाद एक खास काम करने की इच्छा जाहिर करते थे. वो कहते थे कि खून से सनी दिल्ली जाने वाली सड़क पर वो अपनी क्रांतिकारी सेना का संचालन करेंगे लेकिन जैसे ही उन्हें अपने इस उद्देश्य में सफलता मिल जाएगी, तब वो अपने जीवन के असली ध्येय की ओर मुड जाएंगे.
सुभाष बोस पर लिखी पत्रकार संजय श्रीवास्तव की किताब 'सुभाष की अज्ञात यात्रा' में इस बारे में चर्चा की गई है. ये भी बताया गया है कि सुभाष क्यों अक्सर ये बात कहते थे. सुभाष कहते थे,' देश को आजादी मिलते ही वो हिमालय चले जाएंगे, जहां वो ध्यान-भजन करेंगे. यही उनके जीवन का असली ध्येय है.'"
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