"सीमाओं से परे सोचने की कला – नहाँना
हर ‘हाँ’ आपके समय और मन की कीमत तय करता है। हर ‘ना’ एक संभावना बंद कर या खोल सकता है। तो सही जवाब कैसे चुनें?
यह किताब आपको सिखाएगी सोच की उलझनों से बाहर आकर स्पष्टता से निर्णय लेना, फिर वह बच्चों की ज़िद हो या रिश्तों की अपेक्षाएँ।
इसमें दिए गए दमदार तरीकों से जानिए किसी भी समस्या को उच्च दृष्टिकोण से देखकर सही ़फैसला कैसे लें।
अगर आप भी यह समझना चाहते हैं कि कब ‘हाँ’ कहना है, कब ‘ना’ और कब इनसे परे कोई तीसरा रास्ता अपनाना है तो यह किताब आपके लिए है।"
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