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[Hindi] - छत अरमान हमारे अपनों के
"इस ऑडियोबुक को डिजिटल वॉइस में रिकॉर्ड किया गया है. छत। झोंपड़ी में छप्पर होता था। संभवतः छप्पर से ही छत शब्द निकला। पहली छत कब और कहां बनाई गई यह कहना मुश्किल है। सिंधु सभ्यता में पक्के मकानों में सपाट छतें बनाई जाती थीं। यह छतें अक्सर लकड़ी से बनी होती थीं और उन पर मिट्टी या घास की परत होती थी। सिंधु घाटी सभ्यता के घर पकी हुई ईंटों से बनाए जाते थे। कुछ घरों में सीढ़ियाँ भी होती थीं जो सपाट छत तक जाती थीं। जहाँ आराम करने के लिए कुछ अतिरिक्त जगह होती थी। प्राचीन मिस्रवासियों ने भी सपाट छतें बनाईं, जो धूप में सुखी हुई मिट्टी की ईंटों से बनी होती थीं। आधुनिक काल में रोम में सिस्टिन चैपल की छत इतालवी पुनर्जागरण कलाकार माइकल एंजेलो बुओनारोती द्वारा बनाई गई थी। इस छत को 1 नवंबर,1512 को जनता के लिए खोल दिया गया था। छतों का इतिहास काफी पुराना है। आधुनिक काल में जब पक्के मकान बनने शुरू हुए तो शायद सीढियां बनाने का चलन शुरू हुआ। शुरुआती दौर में सीढियां बनाना महंगा सौदा था इसलिए लकड़ी की सीढ़ी का इस्तेमाल किया जाता था जिसके सहारे लोग अपनी छत पर आते-जाते रहे। कालांतर में सीढियां बनाना अनिवार्य माना लिया गया। "
Sandeep Kumar Sharma (Author), डिजिटल वॉइस Hanisha G (Narrator)
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[Hindi] - हातिमताई के सात सवाल और कुण्डलिनी शक्ति के सप्त चक्रों का जागरण: कुण्डलिनी शक्ति
"इस ऑडियोबुक को डिजिटल वॉइस में रिकॉर्ड किया गया है. स्त्री से पत्थर बनी परी गुलनार की कहानी है 'हातिमताई और सात सवाल'। वैसे तो कहते हैं कि, यह कहानी '१००१ अरब की रातें' में से ली गई है, किन्तु लगातार मेडिटेशन करने पर, जब कहानी ने अपने रहस्य को खोला तब मालूम हुआ कि, यह कहानी तो कुंडलिनी के सात चक्रों को खोलने की कहानी है। यह कहानी सूफियों की हो सकती है, क्योंकि सूफी साधक ही इस तरह की साधना करते हैं और परमात्मा को एक प्रेयसी मानकर अपनी साधना को करते हैं। इसलिए इस पुस्तक में यह बताया गया है कि, हातिमताई ने किस तरह से सात सवालों का हल करके कुंडलिनी के सात चक्रों को खोल लिया था। इस तरह से यह पुस्तक साधकों के लिए अत्यंत उपयोगी है, और साधकों का मार्गदर्शन करेगी।"
Brahmachari Prahladanand (Author), डिजिटल वॉइस Hanisha G (Narrator)
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[Hindi] - सातवें जन्मदिन की शुभकामना
"इस ऑडियोबुक को डिजिटल वॉइस में रिकॉर्ड किया गया है. वेस्ली का सातवाँ जन्मदिन है! उसकी दुनिया में, आप जो भी चाहेंगे, वह पूरा होगा। देखिए कैसे वह दूसरों के प्रति दयालुता दिखाता है, लालच पर काबू पाता है और दूसरों को प्राथमिकता देता है। साहस, दयालुता और दोस्ती के साथ, वह अपने जन्मदिन को एक अद्भुत रोमांच में बदल देता है!"
Bruce E. Arrington (Author), डिजिटल वॉइस Hanisha G (Narrator)
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[Hindi] - अंग्रेज़ी सीखने के लिए 1000 से अधिक वाक्य: द्विभाषी ऑडियोबुक
"इस ऑडियोबुक को डिजिटल वॉइस में रिकॉर्ड किया गया है. अगर आप भारत में हैं और अंग्रेज़ी सुनने (Listening) की प्रैक्टिस घर बैठे करना चाहते हैं, तो यह ऑडियोबुक आपके लिए एक परफेक्ट साथी है। इस ऑडियोबुक में: 1000+ रोज़ बोले जाने वाले इंग्लिश वाक्य, 100 अलग-अलग रियल-लाइफ टॉपिक्स, जैसे: घर पर बातचीत, ऑफिस के वाक्य, ट्रैवल, बिज़नेस, दोस्ती, रेस्टोरेंट आदि, हर वाक्य पहले इंग्लिश में और फिर उसका हिंदी अनुवाद, ताकि आप आसानी से समझें और याद रखें।"
Celeste Bolton (Author), डिजिटल वॉइस Hanisha G (Narrator)
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[Hindi] - अंग्रेज़ी में दैनिक दिनचर्या: आसानी से अंग्रेज़ी में सोचना सीखें
"इस ऑडियोबुक को डिजिटल वॉइस में रिकॉर्ड किया गया है. अंग्रेज़ी सीखना एक चुनौती हो सकता है, लेकिन एक शक्तिशाली रहस्य है जो इसे आसान बना सकता है: अंग्रेज़ी में सोचना। जब हम अंग्रेज़ी में सोचते हैं, तो सीखना अधिक स्वाभाविक और कम यांत्रिक हो जाता है, क्योंकि हम इसकी संरचनाओं और शब्दावली को आंतरिक रूप से अपनाना शुरू कर देते हैं, जिससे भाषा का प्रयोग अधिक सहज हो जाता है। और अंग्रेज़ी में सोचना शुरू करने का एक प्रभावी तरीका है अपनी रोज़मर्रा की गतिविधियों को मानसिक रूप से अंग्रेज़ी में वर्णित करना। उदाहरण के लिए, जब आप सुबह कपड़े पहन रहे हों, तो आप खुद से कह सकते हैं: 'I'm putting on my shirt' (मैं अपनी शर्ट पहन रहा/रही हूँ) या 'I'm brushing my teeth' (मैं अपने दाँत ब्रश कर रहा/रही हूँ)। जब आप अपनी दैनिक गतिविधियों को अंग्रेज़ी वाक्यों में बदलते हैं, तो आप उन क्रियाओं को नए भाषा के शब्दों और अभिव्यक्तियों से जोड़ना शुरू कर देते हैं। यह सरल अभ्यास — अपनी गतिविधियों को अंग्रेज़ी में बोलना — सोचने की एक आदत विकसित करने में मदद करता है। जितना अधिक आप इसका अभ्यास करेंगे, यह उतना ही आसान होता जाएगा।"
Celeste Bolton (Author), डिजिटल वॉइस Hanisha G (Narrator)
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[Hindi] - कथक योग : शालीना की नृत्यशाला
"इस ऑडियोबुक को डिजिटल वॉइस में रिकॉर्ड किया गया है. िकर्त की मस्कराहट, हर्षोल्लास एव उमग में झमते नाचते पश-पर्ियों को देख कर हमारे पविजों ने नत्य को जन्म र्दया होगा। यह वह यग था जब मनष्य कदरत के बीच रहता था। जगल ही उनकी र्जदगी थी। आज हम भले ही उन्हें आर्दवासी या वनवासी कहें लेर्कन हम जो कछ भी हैं उन्हीं की के द्वारा स ्थार्पत मान्यताओ और र्वज्ञान के कारण है। आयािवति में चार ऋतओ का सगम धरती पर अनोखा िाकर्तक उपहार है। वसत, ग्रीष्म, वर्षाि और शरद ऋत यहा एक खशनमा वातावरण िदान करती हैं। दर्नया में यह चारों ऋतए एक साथ एक भ-भाग पर भारत के अर्तररक्त और कहीं भी नहीं आती। कहीं ग्रीष्म ऋत के साथ शरद ऋत है और इन दोनों में वर्षाि होती है। तो कहीं शरद ऋत का िभाव अर्धक है और ग्रीष्म ऋत अशकार्लक है। दर्नया में वसत ऋत भी अशकार्लक है र्कन्त भारत भर्म पर चारों ऋतए पणिकार्लक हैं। यही कारण है र्क यहा ईश्वर का वास है। देवताओ की कमिभर्म और जीवत होती जीवनशैली को यही से सारी दर्नया में फैलाया गया। इसी जीवनशैली का एक अग है नत्य।"
DR.SANDEEP KUMAR SHARMA (Author), डिजिटल वॉइस Hanisha G (Narrator)
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[Hindi] - Nautapa Ki Laghu Kathayen
"इस ऑडियोबुक को डिजिटल वॉइस में रिकॉर्ड किया गया है. सनातन पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ के महीने के शुक्ल पक्ष में पूर्णिमा के नौ दिन पहले सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करने पर नौतपा की शुरू हो जाते हैं। ज्योतिष गणनाओं के मुताबिक जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में होकर वृष राशि के 10 से 20 अंश तक रहता है, तब नौतपा होता है। इन 9 दिनों तक सूर्य पृथ्वी के काफी करीब आ जाता है। इस नक्षत्र में सूर्य 15 दिनों तक रहता है, लेकिन शुरुआत के 9 दिनों में गर्मी बहुत ज्यादा होती है। सूर्य का तापमान 9 दिनों तक सबसे अधिक रहता है, इसलिए 9 दिनों के समय को ही नौतपा कहा जाता है। इन नौ दिनों में बारिश न हो और ठंडी हवा न चले तो यह माना जाता है कि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होगी। इस दौरान सूर्य की गर्मी और रोहिणी के जल तत्व के कारण मानसून गर्भ में जाता है और नौतपा ही मानसून का गर्भकाल माना जाता है। सूर्य 12 राशियों, 27 नक्षत्रों में भ्रमण करता है। ज्योतिष के अनुसार सूर्य कुंडली में जिस भी ग्रह के साथ बैठता है, उसके प्रभाव का अस्त कर देता है। विदेशों में नहीं आता नौतपा। है न आश्चर्य की बात। नौतपा केवल भारत में, विशेषकर उत्तर भारत में, एक पारंपरिक धारणा है। यह नौ दिनों की अवधि है जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है और भीषण गर्मी पड़ती है। यह धारणा भारत के ज्योतिषीय और कृषि परंपराओं में जुड़ी हुई है। विदेशों में, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां भारत की जलवायु और कृषि पद्धतियाँ समान नहीं हैं, नौतपा की अवधारणा और महत्व नहीं होता है। खेती किसानी के लिए ये दिन खास होते हैं. माना जाता है कि इन दिनों में अगर देश में धूप खूब अच्छी तपे तो देश में बढ़िया मानसून आता है और नवतपा या नौतपा के दिनों में बारिश होने का मतलब है कि मानसून कमजोर या देरी से आने वाला हो सकता है। मानसून की राह देखते किसान मानते हैं कि नौतपा खूब तपा तो उस साल बारिश जमकर होगी। इसके पीछे वह पुरानी मान्यताओं का हवाला देते हैं जिसमें कहा गया है - तपै नवतपा नव दिन जोय, तौ पुन बरखा पूरन होय। इसके विपरीत मौसम विभाग और मौसम वैज्ञानिक नौतपा को मान्यता नहीं देते। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार हर साल मई के आखिर और जून के पहले हफ्ते में गर्मी ज्यादा पड़ना शुरू होती है। इस बढ़ती गर्मी का कारण है सूर्य की स्थिति बदलना। इस कालखंड में सूर्य घूमते हुए मध्य भारत के ऊपर आ जाता है और जून में कर्क रेखा के पास पहुंच जाता है। इस दौरान यह 90 डिग्री की पोजिशन में होता है। जिससे किरणें सीधे पृथ्वी पर पड़ती हैं। इसी कारण तापमान बढ़ जाता है। यह बढ़ा हुआ तापमान कितने दिनों तक एक समान रहेगा इस विषय में निश्चित रूप से कुछ भी नहीं कहा जा सकता। भारतीय सामाजिक मान्यता कि ज्यादा गर्मी पड़ने से मानसून अच्छा ही होगा, का समर्थन मौसम वैज्ञानिक नहीं करते। उनके अनुसार ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि यदि भीषण गर्मी पड़ने के बाद बारिश भी अच्छी होगी। वैज्ञानिकों के मुताबिक गर्मी तेज होने से मैदानी क्षेत्रों में निम्न दबाव का क्षेत्र निर्मित होता है, इसे हीट लो कहा जाता है। यह मानसून को सक्रिय करने में मददगार होता है। लेकिन हम यह नहीं कह सकते कि अधिक गर्मी पड़ने से मानूसन भी अच्छा होगा। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि सूर्य की स्थिति बदलना एक सामान्य प्रक्रिया है और ज्योतिष में इसे नौतपा नाम दे दिया गया है। इन दिनों में 45 से 48 डिग्री तक तापमान पहुंचना सामान्य बात है। राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों का तापमान 48 डिग्री से अधिक पहुंच जाता है।"
DR. SANDEEP KUMAR SHARMA (Author), डिजिटल वॉइस Hanisha G (Narrator)
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[Hindi] - अपने सौतेले पिता के साथ घर पर अकेली: वर्जित कामुक लघु कहानी
"इस ऑडियोबुक को डिजिटल वॉइस में रिकॉर्ड किया गया है. मेगन को हमेशा से ही अपने सौतेले पिता पर क्रश रहा है। कोई बड़ी बात नहीं, कम से कम अठारह साल की होने तक, जब तक वह अपने क्रश को किसी वास्तविक चीज़ में बदलने की कोशिश करने का फैसला नहीं करती। सौभाग्य से, उसकी माँ की लगातार व्यावसायिक यात्राएँ उसे अपने सौतेले पिता को लुभाने के लिए बहुत सारे अवसर देती हैं। हालाँकि, उसके लिए दुर्भाग्य से, उसे यह एहसास नहीं होता है कि मेगन अब एक बच्ची नहीं बल्कि एक आकर्षक युवा महिला है। आखिरकार चीजें एक महत्वपूर्ण मोड़ पर आती हैं जब मेगन को पता चलता है कि उसकी माँ उसके सौतेले पिता को धोखा दे रही है। क्या यह आखिरकार उसे उससे मासूम प्यार से बढ़कर कुछ पाने का असली मौका देगा?"
Bottolini (Author), डिजिटल वॉइस Hanisha G (Narrator)
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"इस ऑडियोबुक को डिजिटल वॉइस में रिकॉर्ड किया गया है. प्रस्तुत उपन्यास 'दो बटा शून्य' काव्या पब्लिकेशंस से प्रकाशित होने वाली डॉ. संजीव कुमार चौधरी की विगत चार वर्षों में पांचवीं पुस्तक है। उनके लेखन की गति ने संभवतः देश के सभी लेखकों को पीछे छोड़ दिया है और उनकी लेखनी की गति की विशेषता यह है कि गद्य और पद्य दोनों विधाओं को समृद्ध किया है। जीवन का लम्बा समय मरीजों की शल्य चिकित्सा को समर्पित करने के बाद दूसरे अर्द्ध में साहित्य के प्रति समर्पित हो जाना अनायास नहीं हो सकता, अतः निश्चित ही डॉ. संजीव प्रसिद्ध लेखकों की तरह जन्मजात लेखक होने का आभास देते हैं। 'दो बटा शून्य' उनकी कलम से निकला पहला उपन्यास है पर जैसे जैसे हम कथानक के साथ आगे बढ़ते हैं, उसका जादू सिर चढ़ता जाता है।भाषा शैली इतनी आम समझ वाली है कि पढ़ने की गति भी आप ही कूदने फांदने लग जाती है। उपन्यास के पात्र और चरित्र परिस्थितियों और समय से टकराते, मस्तिष्क में जीवंत दृश्य निर्मित करते हैं। कथानक को यहां संक्षिप्त में प्रस्तुत करना भी पाठक के साथ अन्याय लग रहा है, अतः उसके वर्णन का लोभ छोड़ते हुए इसे पढ़ने का सुझाव अवश्य देना चाहूंगा। अजय अग्रवाल प्रकाशक काव्या पब्लिकेशंस सृजनात्मक कौतूहल जगाने के साथ साथ रिश्तों की कशमकश से रुबरु कराता एक रोचक उपन्यास - श्री राजेश कुमार सिन्हा साहित्यकार, मुंबई गोदान कृषकों का महाकाव्य है तो 'दो बटा शून्य' विद्यार्थियों का महाकाव्य, जीवन की असीम संभावनाएं लिए जिंदगानी का वृहद समाज शास्त्र - श्री जीतेन्द्र निर्मोही ख्यातिलब्ध उपन्यासकार राजस्थान अत्यंत भावनात्मक कथानक - पत्नी के असामयिक निधन से सन्नाटे में पड़ा नायक बाल सखा से मुलाकात द्वारा जीवन में इंद्रधनुषी सतरंगी छटा बिखेरने की उम्मीद में सृजनात्मक उर्जा से परिपूर्ण ....। - डॉ. अनूप शर्मा मनोचिकित्सक अमेरिका"
Dr Sanjeew Kumar Chowdhary (Author), डिजिटल वॉइस Hanisha G (Narrator)
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[Hindi] - सकारात्मक सोच और सफलता: विचारों की शक्ति का उपयोग
"इस ऑडियोबुक को डिजिटल वॉइस में रिकॉर्ड किया गया है. इस पुस्तक में अमनप्रीत कौर ने विचारों की शक्ति और उनके हमारे जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को गहराई से समझाया है। यह पुस्तक सकारात्मक सोच के महत्व और जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए इसके उपयोग पर केंद्रित है। प्रमुख विषयों में मन-शरीर संबंध, भावनाओं और कार्यों पर विचारों का प्रभाव, विश्वासों की भूमिका, सीमित विश्वासों पर काबू पाना, माइंडफुलनेस और संज्ञानात्मक व्यवहार रणनीतियाँ शामिल हैं। यह पुस्तक पाठकों को नकारात्मक विचार पैटर्न से बचने और सकारात्मक सोच के माध्यम से सफलता की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।"
Amanpreet Kaur (Author), डिजिटल वॉइस Hanisha G (Narrator)
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[Hindi] - Fillipisms 3333 Maxims to Maximize Your Life Hindi Version
"इस ऑडियोबुक को डिजिटल वॉइस में रिकॉर्ड किया गया है. 'यह आश्चर्यजनक हैकि डॉ. प्रतीप फिलिप के पास वैश्विक और ऐतिहासिक रूप से किसी भी भाषा में एक ही व्यक्ति द्वारा लिखेगए सर्वाधिक मौलिक उद्धरणों का रिकॉर्ड है। ब्रायन ट्रेसी प्रेरक वक्ता, 70 पुस्तकों के लेखका 'हालांकि मैं सुकरात, कन्फ्यूशियस, प्लेटो और तिस्वत्तुर जैसे महान लोगों से प्रेरित हूं मेरी आत्मा की गहरी प्रेरणा हमेशा के लिए यीशु का जीवन और शिक्षाएं हो यह किताब आपको जड़ता से बाहर कर देगी - ब्रायन ट्रेसी' प्रकाशन के समय, डॉ. प्रतीप वी फिलिए सीबीसीआईडी, तमिलनाडू भारत के पुलिस महानिदेशक हैं जिनका रेखा रिकॉर्ड इंटीन है और उन्होंने कई बार मौत का सामना किया ही भारतीय पुलिस सेवा के 1987 बेव के एक युवा सहायक पुलिस अवेक्षक केरूप में वह छूने से मूयु के निकट होने के अनुभव सेक्द गाएरा वह दुनिया की पहली मानव कम हत्या-जो कि पूर्व भारतीय प्रधान मंत्री श्री राजीव गांधी की थी. में भी जीवित बचे है और अपने साथ 100 से अधिक स्टील केछरे लेकर चलते हैं तारीखा यह इस दर्दनाक घटना के बाद बाद एक अवत नागरिक सेमिली मानवीय दयालुता थी, जिसने उन्हें फ्रेंड्स ऑफ पुलित आंदोलन को जन्म दिया- एक ऐसा आदोलन जिसे पुलेस प्रशिक्षण और विकास में नवाचार के लिए रानी के पुसार सहित कई प्रक्राएं मिली। महामहिम महारानी एलिजावेध द्वारा 11 और SKOCH गोल्ड अवार्ड भारत में स्वांत्र रूप से स्थापित सर्वोच्च नागरिक सम्माना डॉ. प्रीप वी फिलिप लंदन कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में केन्द्रीकरण का अध्ययन करने के लिए नेकूव और उन्युटता के तिएगरकुल शानिग छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाले भारत के पहले अनेिएक नए वैश्विक अनुशासन-एक्सोनॉनिमा, दुनिया का पहला उत्कृस्ता का आर विषय अध्ययन की संकल्पना की। वह तीन पुस्तकों के प्रकाशित लेखक हो लगातार नवोवेधी दतेहुए, उन्होंने एक अन्ही विचार प्रक्रिया भी बनाई समयमा का एक समय विकल्प है और पार्श्व सोच, इसमें दो सम्मान र है इसमें ले सकारात्मकताओं और थतियों का स्थिर सुद्द्धीकरण, और इसे हकओं, विनिर्विसिस में प्रतीप ती फिलिप के जीवन के अनुभवों का एक निकर विमतारित उद्धरण और ईयू सबैच का उप-अफद है।"
Dr Prateep V Philip Ips (Author), डिजिटल वॉइस Hanisha G (Narrator)
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[Hindi] - विवाह: भारतीय संस्कृति का आदर्श
"इस ऑडियोबुक को डिजिटल वॉइस में रिकॉर्ड किया गया है. 'विवाह: भारतीय संस्कृति का आदर्श' एक आधारभूत और गहराई से उत्तराधिकारी तथ्यों से भरपूर पुस्तक है जो भारतीय विवाह के विभिन्न पहलुओं को प्रकट करती है। इस पुस्तक में, भारतीय समाज के विवाह संस्कृति के सभी पहलुओं को विस्तार से विश्लेषण किया गया है, सहित रस्में, अनुष्ठान, परंपराएं, और उनके पीछे के विचारधारा। इस पुस्तक में विवाह से संबंधित भारतीय समाज की प्राचीन और समकालीन परंपराओं को परिपूर्णता के साथ वर्णित किया गया है। प्राचीन वैदिक अनुष्ठान से लेकर आधुनिक विवाह उद्योग तक, इस पुस्तक ने सभी पहलुओं को समाहित किया है। यह पुस्तक भारतीय संस्कृति के विवाह के विशेषताओं को अध्ययन करने के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन है। यह उन लोगों के लिए उपयुक्त होगी जो भारतीय सांस्कृतिक विवाहों को समझने और उसमें रुचि लेने की इच्छुक हैं, साथ ही विवाह के प्रति गहरा रुचि रखने वाले सभी पाठकों के लिए भी। 'Wedding: A Reflection of Indian Culture' is a comprehensive and deeply insightful book that delves into various facets of Indian weddings. Within its pages, every aspect of the Indian marriage tradition is meticulously examined, including rituals, ceremonies, traditions, and the underlying philosophies. This book intricately portrays the ancient and contemporary customs surrounding marriage in Indian society, capturing the essence of Vedic rituals to modern wedding industries. From ancient Vedic ceremonies to contemporary trends in the wedding industry, this book encompasses all aspects. It serves as a vital resource for understanding the unique features of Indian cultural weddings. Suitable for those interested in comprehending Indian cultural weddings and for all readers with a profound interest in weddings, this book offers a rich exploration into the profound intricacies of marriage in Indian culture."
Ranjot Singh Chahal (Author), डिजिटल वॉइस Hanisha G (Narrator)
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